दो कप चाय गरम कीजिए – तेजस

इतना भी क्या कोई ग़म कीजिए
ताल्लुक़ात थोड़ा कम कीजिए

कीजिए ज़रा ख़ुद पे भरोसा
अपने होने का वहम कीजिए

मार डाले ना #बेख़ुदी एक दिन
ख़ुद पे थोड़ा सा रहम कीजिए

ज़िन्दगी भर ज़िन्दगी का रोना
मुस्कुरा ना सके शरम कीजिए

बात यही ख़तम करते है #तेजस
जाके दो कप चाय गरम कीजिए

– तेजस ‘नीरा नंदन’

आईना कहता है – तेजस

आईना कहता है

आइना कहता हैं के मैं बुरा बहुत हूं,
मेरी परछाई कहती हैं मैं अधूरा बहुत हूं।

किसका कहना मानू समझ में नही आता
कहने को हर शख़्स से मैं जुड़ा बहुत हूं।

मुझकों मालूम हैं अपनी कमजोरियां
अकेले ही ख़ुद से मैं लड़ा बहुत हूं।

यूं तो फ़ुर्सत नही हैं के झांक लूं ज़माना
मग़र ज़िन्दगी के झगड़े में पड़ा बहुत हूं।

फ़र्क नही पड़ता मुझकों दुनिया के निगाहों से,
इतना काफ़ी हैं अपनी नज़र में खरा बहुत हूं।

होने दो

ग़र होता है तो सवाल होने दो,
हर मिसाल को बेमिसाल होने दो।

देखे ज़माने में लाख जलवें हमनें,
ज़माने में हमारा कमाल होने दो।

इसके उसके सबके ही झगड़े है,
एक दो अपना भी बवाल होने दो।

ज़िन्दगी गुज़ार दी वाह वाही में,
इस बात का ज़रा मलाल होने दो।

माना मेरी मनमार्जियां मंजूर नही,
मन मारके सही फ़िलहाल होने दो।

और क्या है …

तुम धड़कन मैं साँस ज़रूरत और क्या है
मैं ज़िस्म तुम रूह मोहब्बत और क्या है

सुबहों शाम तुम रहती हो मेरे ख़यालो में,
ये आदत नही तो बता आदत और क्या है

तेरे सज़दे में झुककर मैं लिखता हूँ ग़ज़ल,
ये इबादत नही तो बता इबादत और क्या है

रात भर सोने नही देती हो ख़्वाब मे आकर,
ये शरारत नही तो बता शरारत और क्या है

ख़्वाब मे तुम्हे पलकें उठाकर देख नही पाता,
ये शराफ़त नही तो बता शराफ़त और क्या है

#तेजस

सिवा मौत के कोई रास्ता है क्या

मुझे छोड़ जाने वाले मेरी ख़ता है क्या,
ख़ता क्यों हुई होगी तुझे पता है क्या।

साँसे ख़ुद ही रूठ जाए जब धड़कनों से,
तू बता सिवा मौत के और रास्ता है क्या।

ये ना कह के कोई लेना देना नही मुझसे,
लेन देन का तुझसे मेरा वास्ता है क्या।

ताउम्र मैंने अपना दे दिया तुझे दिलबर,
तू पूछता है तुझसे मेरा राब्ता है क्या।

अब बस भी कर बातें ना बना तेजस,
बातों के सिवा तुझे कुछ आता है क्या।

हम भी कुछ कम नही रखते

बहुत बेदर्द हैं ये दुनिया ..तो क्या
ज़ख्म दिल पे यारों
हम भी कुछ कम नही रखते।

वफ़ा का चलन ना रहा …तो क्या
इश्क़ दिल में यारों
हम भी कुछ कम नही रखते।

नजरों का फ़रेब हैं हर अदा.. तो क्या
हुस्न पे नज़र
हम भी कुछ कम नही रखते।

रखता हैं निग़ाह ऊपरवाला ..तो क्या
ख़ुदा पे यक़ीन
हम भी कुछ कम नही रखते।

ज़माने से शिकायत करें भी तो क्या… ‘तेजस’
ज़ख़्मो का हिसाब
कभी हम नही रखते।

– तेजस

किस बात पर

किस बात पर …

है तू हैरान! किस बात पर,
तू है परेशान किस बात पर।

मिट्टी का तू मिट्टी की दुनिया,
तुझको गुमान किस बात पर।

देख! सुन! तू मान मेरी बात
इतना अभिमान किस बात पर।

खोना-पाना तो चलता रहता है,
रोता है नादान किस बात पर।

दुनिया की बातों में रखा है क्या,
लड़ाए हम ज़ुबान किस बात पर।

-तेजस

इश्क़ आज बेहद करते है

चलो अब हद करते है,
इश्क़ आज बेहद करते है।

फिर कोई नया मामला हो,
पुराना सब रद्द करते है।

आशिकों में सबसे ऊपर,
लंबा अपना कद करते है।

कोई दिलरुबा नही तो क्या,
खुद ही को गदगद करते है।

अपनी धुन अपना ही तराना
ख़यालो को सरहद करते है।

#तेजस

पूछते मेरा हाल चाल

तुझपे मर जाऊँ ऐसी कोई चाल चल,
रस्मी ही सही पूछते मेरा हाल चल।

जानी तू मेरे जान का हो गया दुश्मन,
रंजिशें सारी दिल से निकाल चल।

हालात मेरे तब भी बिगड़े थे आज भी,
तू संभल गया मुझे भी सम्भाल चल।

है मालूम तेरा अपना कोई सानी नही,
मिलके करते है दोनों कमाल चल।

खा जाता है अपना घर चुप्पी का घुन
राब्ता पुराना करके बहाल चल।

#तेजस